Aravalli Green Wall Project: अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट, थार के फैलाव को रोकेगी यह दीवार

क्या आपको पता है? भारत 15 सौ किलोमीटर लंबी दीवार बना रहा है। थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने के लिए भारत सरकार ने अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। दरअसल थार रेगिस्तान पिछले 15 वर्षों में डेढ़ करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैल गया है।

थार के फैलाव को रोकेगी यह दीवार
थार के फैलाव को रोकेगी यह दीवार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण को रोकने के लिए एक प्रोजेक्ट लॉन्च किया है जिसका नाम अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट। इसी तरह का प्रोजेक्ट अफ्रीका में भी लांच किया गया था उसी से प्रेरित होकर भारत ने भी यह प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। दरअसल अरावली क्षेत्र में जंगल काटने व माइनिंग की वजह से थार मरुस्थल का फैलाव बढ़ता जा रहा है।

पहले प्राकृतिक रूप से अरावली पर्वत श्रंखला मरुस्थलीकरण को रोकती थी। लगभग 50 वर्षों से अरावली क्षेत्र के वनों की कटाई व अवैध खनन से अरावली पर्वत की मरुस्थलीकरण को रोकने की क्षमता खत्म हो रही हैं।

अरावली
अरावली

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना क्या है?

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना केंद्र सरकार की एक पहल है जिससे मरुस्थलीकरण को कम करने के साथ मृदा विघटन को कम करने में मदद मिलेगी। यह 4 राज्यों दिल्ली हरियाणा राजस्थान और गुजरात, की परियोजना है जिस के तहत चारों राज्यों में अरावली पर्वत माला क्षेत्र में वृक्षारोपण किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण को फायदा होगा। इस परियोजना के अंतर्गत अरावली श्रंखला के 5 किलोमीटर के दायरे में वृक्षारोपण किया जाएगा। नदियों, तालाबों और झीलों जैसे जल स्रोतों पुनर्निर्माण और मरम्मत करने के साथ-साथ बंजर भूमि पर पेड़ पौधों व झाड़ियां मूल की प्रजातियां लगाना शामिल है।

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Aravalli Hills Desert
अरावली ग्रीन वाल प्रोजेक्ट

यह परियोजना पर्यावरण विभाग, वन विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। पर्यावरण विभाग वैसे तो देशभर में  हरित मार्ग बनाने का काम कर रहा है जिससे कि मृदा क्षरण और मरुस्थल फैलाव को कम करने में मदद मिले। यह परियोजना चार राज्यों में संचालित की जा रही है जहां अरावली पर्वत श्रंखला है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य मृदा क्षरण व थार रेगिस्तान के पूर्व में विस्तार को रोकना है।
  • दिल्ली से हरियाणा, राजस्थान व गुजरात तक हरित मार्ग का निर्माण किया जाएगा, इसके लिए बंजर भूमि में पेड़ पौधे व झाड़ी वाले पौधे लगाए जाएंगे।
  • पर्यावरण के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट का फायदा वन्यजीवों को भी होगा। विभिन्न जल स्रोत तालाबों झीलों और नदियों को संरक्षित किया जाएगा।
  • यह एक बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट है जैसे अरावली रेंज के पारिस्थितिक तंत्र में सुधार, मिट्टी के कटाव को कम करना , मरुस्थलीकरण और धूल भरी आंधी को रोकने के लिए हरित रुकावट पैदा करना आदि।
  • UNCCD (यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन टू कम्बैट डायवर्सिफिकेशन), CBD (कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी) और UNFCCC (यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज) जैसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशंस के लिए भारत की प्रतिबद्धताओं में योगदान देना।
  • अरावली पर्वत श्रृंखला जोकि विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रंखलाऔं में से एक हैं। अरावली पर्वत गुजरात, राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली तक फैली हुई है।
  • अरावली पर्वत की सबसे ऊंची चोटी का नाम गुरुशिखर है जिसकी ऊंचाई 1722 मीटर (5650 फुट) हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास में वैश्विक राजनीति में भारत की छवि को बढ़ाना।
  • अरावली हरित दीवार परियोजना को केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा वन विभागों, अनुसंधान संस्थानों, एनजीओ, निजी क्षेत्र की संस्थाओं और स्थानीय समुदायों जैसे विभिन्न हितधारकों द्वारा संचालित किया जाएगा।
  • वनीकरण, कृषि-वानिकी और जल संरक्षण गतिविधियों में स्थानीय समुदायों को शामिल करके सतत विकास और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना जिससे आय, रोजगार, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक लाभ उत्पन्न होंगे।
  • यह हरी दीवार अरावली क्षेत्र में देशी वृक्ष प्रजातियों को लगाकर अरावली रेंज की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बढ़ाने के लिए कार्बन पृथक्करण और जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करेगी।
  • वन्य जीवन के लिए आवास प्रदान करना, पानी की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करना।
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Source-GK, Media, PIB India

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